स्वर ब्रह्म है, निराकार है। शब्द साकार है, संसार है, संस्कार है और अभिव्यक्ति का सशक्त आधार है। उस आधार के आधार से ही ‘‘लोक सम्मान’’ है। ‘लोक’ अथार्त समस्त सृष्टि। ‘सम्मान’ अर्थात सहअस्तित्व पूर्ण व्यवहार। सम्मान के लिए सामाजिक सुरक्षा व विकास के साथ-साथ जड़ चेतन के संरक्षण-संवर्धन की अवधारणा का संदेश जन-जन तक पहुँचे, यही पत्रिका का उद्देश्य है। जिसका मूलभाव है, ‘‘सब एक दूसरे के पूरक हैं तथा सबको सामंजस्य के साथ सुख-शान्ति से जीने का हक है।
भारत सुजलाम-सुफलाम की कामनाओं, भावनाओं एवं परम्पराओं का देश है, यहाँ माँ गंगा जैसी पवित्र नदियाँ, देवात्मा हिमालय जैसी उत्तुंग पर्वत श्रंखलाएं तथा मानसरोवर जैसी निर्मल-पावन झीलें हैं, जो राष्ट्रीय एकात्मता की संवाहक, संरक्षक व संधारक हैं। सनातन संस्कृति का बोध इसके कण-कण में समाहित है। यहाँ सामाजिक जीवन व संस्कारों में प्रकृति भाव व्याप्त है। जल-स्रोत, कुँआ, तालाब, नदी, पेड़, पहाड़, जीव, जड़-चेतन सभी उसके जीवन में माला की भाँति गुंथे हुए हैं। सभी देते है इसलिए पूज्य हैं। उनका संरक्षण संवर्धन हमारे सुखी-समृद्ध भविष्य के लिए आवश्यक है।
इसी भाव, विचार और उद्देश्य की संवाहक ‘लोक सम्मान’ जो आपकी अपनी पत्रिका हैै। इसके द्वारा उपयुक्त विषय-वस्तु एवं नियमित संदेश जन-जन तक समय से पहुँच सके, इस हेतु आप की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण है। आप स्वयं समर्थ हैं, विचार, अनुभूति, निर्णय और अभिव्यक्ति में।
आपका स्नेह हमारा संबल है। आपका सहयोग हमारी प्रेरणा है। हमें प्रतीक्षा है, आपके सुझावों, विचारों, संदेशों और सहयोग भरे उत्तर की। आप lokbharti@yahoo.com पर ई-मेल कर सकते हैं। संस्था आपकी अत्यन्त आभारी रहेगी।
भारत सुजलाम-सुफलाम की कामनाओं, भावनाओं एवं परम्पराओं का देश है, यहाँ माँ गंगा जैसी पवित्र नदियाँ, देवात्मा हिमालय जैसी उत्तुंग पर्वत श्रंखलाएं तथा मानसरोवर जैसी निर्मल-पावन झीलें हैं, जो राष्ट्रीय एकात्मता की संवाहक, संरक्षक व संधारक हैं। सनातन संस्कृति का बोध इसके कण-कण में समाहित है। यहाँ सामाजिक जीवन व संस्कारों में प्रकृति भाव व्याप्त है। जल-स्रोत, कुँआ, तालाब, नदी, पेड़, पहाड़, जीव, जड़-चेतन सभी उसके जीवन में माला की भाँति गुंथे हुए हैं। सभी देते है इसलिए पूज्य हैं। उनका संरक्षण संवर्धन हमारे सुखी-समृद्ध भविष्य के लिए आवश्यक है।
इसी भाव, विचार और उद्देश्य की संवाहक ‘लोक सम्मान’ जो आपकी अपनी पत्रिका हैै। इसके द्वारा उपयुक्त विषय-वस्तु एवं नियमित संदेश जन-जन तक समय से पहुँच सके, इस हेतु आप की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण है। आप स्वयं समर्थ हैं, विचार, अनुभूति, निर्णय और अभिव्यक्ति में।
आपका स्नेह हमारा संबल है। आपका सहयोग हमारी प्रेरणा है। हमें प्रतीक्षा है, आपके सुझावों, विचारों, संदेशों और सहयोग भरे उत्तर की। आप lokbharti@yahoo.com पर ई-मेल कर सकते हैं। संस्था आपकी अत्यन्त आभारी रहेगी।





