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Sunday, January 11, 2015






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  • अब प्राकृतिक रूप से पकाएं कच्चे फल - डाॅ॰ राज किशोर एवं डाॅ॰ वी॰के॰ चैधरी
    देश में जनसंख्या बढ़ने तथा स्वास्थ्य के प्रति लोगो की बढ़ती जागरूकता से राष्ट्रीय स्तर पर बड़े शहरों से लेकर सुदूर गाँवों तक बाजार में विभ...
  • शून्य लागत (जीरो बजट) प्राकृतिक कृषि अभियान प्रवर्तक- श्री सुभाष पालेकर
    गांव का पैसा गांव में                गांव का पैसा शहर में नहीं                शहर का पैसा गांव में भारत में हरित क्रान्ति के नाम पर अन्धा...
  • भारतीय विभागों के घोष वाक्य -
    भारत के घोषित ध्येय वाक्य, हैं सांस्कृतिक विरासत के उदघोषक। सब में अमृत तत्व भरा है, स्वयमेव भारतीयता के हैं पोषक।।1।। ‘सत्यमेव जयते’ ज...
  • शून्य लागत (जीरो बजट) प्राकृतिक कृषि अभियान - गोपाल उपाध्याय
    भारत में हरित क्रान्ति के नाम पर अन्धाधुन्ध रासायनिक उर्वरकों हानिकारक कीटनाशकों, हाईब्रिड बीजों एवं अधिकाधिक भूजल उपयोग से भूमि की उर्वरा ...
  • नदियों के किनारे स्थित तीर्थों का सम्यक विकास -डा॰ महेन्द्र प्रताप सिंह
    हमारे देश के प्रायः सभी प्राचीन तीर्थस्थल नदियों के किनारे स्थित हैं। नदियों की स्वच्छता हेतु चलाए जा रहे विभिन्न प्रयत्नों के क्रम में नद...
  • शून्य लागत प्राकृतिक खेती.एक एकड़ खेत का माॅडल.- हिमांशु गंगवार
    किसानों के लिए शून्य लागत प्राकृतिक खेती वरदान सिद्ध हो सकती है। जिसके लिए आवश्यक है, किसान के पास एक देशी गाय और मिश्रित खेती करने का तरी...
  • भूगर्भ जल की समस्या-समाधान वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग)
    वर्तमान परिदृष्य में शहरीकरण एवं बढ़ती हुई आबादी के कारण प्राकृतिक जल स्त्रोतों का अत्यधिक एवं अव्यवस्थित ढंग से दोहन हो रहा है, जिससे स्वच...
  • लोक भारती द्वारा आयोजित/संयोजित/समन्वित कार्यक्रमों में पधारे विशिष्ट व्यक्ति
    साक्षराता प्रशिक्षण वर्ग, लखनऊ, 16, 17 अगस्त, 1992 डा॰ कृष्णौतार पाण्डे, निदेशक प्रौढ शिक्षा, उत्तर प्रदेश श्री एस॰एस॰यदुवंशी, संयुक्त नि...
  • गौ आधारित शून्य लागत, आध्यात्मिक खेती - लोक भारती प्रतिनिधि
    सुभाष पालेकर सतत साधना का नाम है। प्रारम्भिक जीवन से ही आध्यात्म के साथ सामाजिक भाव होने के कारण वह प्रायः विनोवा जी से मिलने जाया करते थे...
  • रबी में गन्ने की सहफसली खेती - हिमांशु गंगवार
    खेती किसानी में समस्यायें विगत कुछ वर्षों से गुणात्मक रूप से बढ़ रही हैं। लेकिन यह सभी समस्यायें मनुष्य द्वारा निर्मित हैं। मनुष्य के तीन ...
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